Massive solar storm likely to hit Earth | सूरज पर उठते तूफान से धरती पर इंटरनेट को खतरा, जानें कितनी बड़ी होगी तबाही


नई दिल्ली: धरती का चुंबकीय क्षेत्र इंसानों को सूरज से आने वाले खतरनाक रेडिएशन से बचाता है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि सूरज पर उठने वाले तूफान का असर सैटेलाइट टेक्नोलॉजी पर हो सकता है. सोलर विंड की वजह से धरती का बाहरी वायुमंडल गरमा सकता है और इसका असर सैटलाइट्स पर पड़ सकता है.

कैसे आते हैं सौर तूफान?

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के मुताबिक, सामान्य तौर पर सौर तूफान 10-20 लाख मील प्रतिघंटे की रफ्तार से चलते हैं. ये सूरज के coronal holes से उठते हैं. सूरज में विस्फोट होने से इनसे Coronal mass ejection भी निकलते हैं.

वहीं सौर हवाओं के साथ हमारे सबसे करीबी सितारे से निकला रेडिएशन चार्ज्ड पार्टिकल्स को धरती पर लाता है. ये चार्ज्ड पार्टिकल्स स्पेस में ट्रैवल करते हैं और बेहद तेज गति पर धरती की ओर आते हैं. जब ये धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं तो रोशनी की शक्ल में एनर्जी रिलीज होती है. इसे Aurora कहते हैं.

गर्म हो सकता है धरती का बाहरी वायुमंडल 

वैज्ञानिकों का मानना है कि सूरज पर उठते तूफानों का असर सैटेलाइट पर आधारित टेक्नोलॉजी पर हो सकता है. सोलर विंड की वजह से धरती का बाहरी वायुमंडल गर्म हो सकता है, जिससे सैटलाइट्स पर असर होता है.

तूफानों का असर 

इससे जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है. वहीं पावर लाइन्स में करंट तेज हो सकता है जिससे ट्रांसफॉर्मर भी उड़ सकते हैं. 1859 और 1921 में ऐसे तूफानों का असर धरती पर देखा गया था. वर्ष 1859 में आए सबसे शक्तिशाली जिओमैग्‍नेटिक तूफान ने यूरोप और अमेरिका में टेलिग्राफ नेटवर्क को तबाह कर दिया था. इसके अलावा कम तीव्रता का एक सौर तूफान 1989 में भी आया था.

परिणाम ज्‍यादा भयावह

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इलेक्टिकल ग्रिड और इंटरनेट पर असर के जरिए इनकी तीव्रता को समझा जा सकता है. Solar Superstorms: Planning for an Internet Apocalypse शीर्षक से छपे एक रिसर्च पेपर के मुताबिक,  पिछले तूफान के मुकाबले इस बार सौर तूफान से परिणाम ज्‍यादा भयावह हो सकता है. सौर तूफान आने पर हमारे अंतरिक्ष में चक्‍कर लगा रहे सैटलाइट प्रभावित हो सकते हैं और इससे हमारी संचार और जीपीएस प्रणाली ठप पड़ सकती है.





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