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UNGA में पीएम मोदी ने अफगान संकट, वैक्सीन, पाकिस्तान, विस्तारवाद-आतंकवाद समेत कई मुद्दों को उठाया- India TV Hindi
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UNGA में पीएम मोदी ने अफगान संकट, वैक्सीन, पाकिस्तान, विस्तारवाद-आतंकवाद समेत कई मुद्दों को उठाया

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76 वें सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान संकट, आतंकवाद, लोकतंत्र, विस्तारवाद और कोरोना वैक्सीन समेत कई मुद्दों को उठाया। पीएम मोदी ने संबोधन की शुरुआत कोविड-19 के कारण दुनियाभर में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए की। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक संस्‍था (UN) को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए इसमें सुधार की आवश्‍यकता है साथ ही कट्टरपंथी सोच पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा है।

अफगान संकट के वक्त भी यूएन सवालों के घेरे में रहा- पीएम मोदी

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यूएन आतंकवाद को रोकने में सफल नहीं रहा। अफगान संकट के वक्त भी यूएन सवालों के घेरे में रहा है। यूएन के तरीके पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। यूएन को सफल होना है तो सुधार लाना होगा, यूएन को विश्वसनीयता बढ़ानी होगी। संयुक्त राष्ट्र को स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपनी इफेक्टिवनेस को सुधारना होगा, रिलायबिलिटी को बढ़ाया होगा। UN पर आज कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए ना हो- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए ना हो। हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा वहां कि नाजुक स्थितियों का इस्तेमाल कोई देश अपने स्वार्थ के लिए एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करे। चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया को विस्तारवाद पर लगाम लगानी होगी। विस्तारवाद की मंशा दुनिया के लिए खतरा है। अफगानिस्तान को पाकिस्तान टूल की तरह इस्तेमाल ना करे। विस्तारवादी सोच को रोकना होगा। 

भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है- पीएम मोदी 

पीएम मोदी ने कहा कि अध्यक्ष महोदय, सेवा परमोधर्म: को जीने वाला भारत सीमित संशाधनों के बावजूद भी वैक्सीन डेवल्पमेंट और मैन्युफैक्चरिंग में जी जान से जुटा है, मैं unga को यह जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल की आयु से ज्यादा के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और mrna वैक्सीन अपने डेवल्पमेंट के अंतिम चरण में है, भारत के वैज्ञानिक कोरोना की एक नेजल वैक्सीन के निर्माण में भी जुटे हैं, मानवता के प्रति अपने दायित्व को समझते हुए भारत ने एक बार फिर दुनिया के जरूरतमंदों को वैक्सीन देनी शुरू कर दी है। मैं आज दुनियाभर के वैक्सीन मैन्युफैक्चरर्स को भी आमंत्रित करता हूं, आइए और भारत में वैक्सीन बनाइए। 

भारत में रिफॉर्म होते हैं तो दुनिया में ट्रांस्फॉर्म होते हैं- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि आज विश्व का हर 6ठा व्यक्ति भारतीय है, जब भारतीयों की प्रगति होती है तो विश्व के विकास को भी गति मिलती है, जब भारत की ग्रोथ होती है तो दुनिया की ग्रोथ होती है, जब भारत में रिफॉर्म होते हैं तो दुनिया में ट्रांस्फॉर्म होते हैं। भारत में हो रहे साइंस और टेक्नोलॉजी आधारित इनोवेशन विश्व की बहुत मदद कर सकते हैं। हमारे टैक्स सोल्य़ूशन का स्केल और उनकी कम लागत दोनों अतुलनीय है। हमारे युनिफाइड पेमेंट इंटरफेस आज भारत में हर महीने 350 करोड़ से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, भारत का वैक्सीन डिलिवरी प्लेटफॉर्म कोविन एक ही दिन में करोड़ों वैक्सीन डोज लगाने के लिए डिजिटल सपोर्ट दे रहा है।

ओसियन रिसोर्सेज को हम यूज करें अब्यूज नहीं- पीएम मोदी

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें ध्यान रखना होगा ओसियन रिसोर्सेज को हम यूज करें अब्यूज नहीं, हमारे समुद्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की लाइफलाइन भी हैं। इन्हें हमें एक्सपैंशन और एक्सक्लूजन की दौड़ से बचाकर रखना होग। हमारे समुद्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की लाइफलाइन भी हैं। इन्हें हमें एक्सपैंशन और एक्सक्लूजन की दौड़ से बचाकर रखना होगा। हमारे समुद्र भी हमारी साझी विरासत है इसलिए हमें ये ध्यान रखना होगा कि ओसियन रिसोर्सेज को हम यूज करें अब्यूज नहीं। 

भारत वाइब्रेंड डेमोक्रेसी का बेहतरीन उदाहरण- मोदी 

पीएम मोदी ने कहा कि- अध्यक्ष महोदय, पिछले डेढ़ वर्ष से पूरा विश्व 100 साल में आई सबसे बड़ी कोरोना महामारी से ग्रस्त है, मैं श्रद्धांजलि देता हूं और परिवारों के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं, अध्यक्ष महोदय मैं उस देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं जिसे मदर ऑफ डेमोक्रेसी का गौरव हासिल है, लोकतंत्र की हमारी हजारों वर्षों की महान परंपरा रही है। इस 15 अगस्त को भारत ने अपनी आजादी के 75वें साल मे प्रवेश किया है, हमारी विविधता, हमारे सशक्त लोकतंत्र की पहचान है। एक ऐसा देश जिसमें दर्जनों भाषाएं हैं, सैंकड़ों बोलियां हैं, अलग अलग रहन सहन खान पान है। यह वाइब्रेंड डेमोक्रेसी का बेहतरीन उदाहरण है, यह भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन के टी-स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था वह आज चौथी बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर UNGA को संबोधित कर रहा है। सबसे लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर पिछले 7 साल से भारत के प्रधानमत्री के तौर पर मुझे हेड ऑफ गवर्नमेंट की भूमिका में देशवासियों की सेवा करते हुए 20 साल हो रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं, Yes Democracy Can Deliver, Yes Democracy Has Deliver। भारत 75 ऐसे सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने वाला है जो भारतीय विद्यार्थी स्कूल कॉलेजों में बना रहे हैं।

’17 करोड़ से अधिक घरों तक पाइप से साफ पानी पहुंचाने का बहुत बड़ा अभियान चला रहे हैं’

पीएम मोदी ने कहा कि- अध्यक्ष महोदय, प्रदूषित पानी भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व और खासकर गरीब तथा विकासशील देशों की बड़ी समस्या है, भारत ने इस चुनौती से निपटने के लिए 17 करोड़ से अधिक घरों तक पाइप से साफ पानी पहुंचाने का बहुत बड़ा अभियान चला रहे हैं। विश्व की बड़ी बड़ी संस्थाओं ने यह माना है कि किसी भी देश के विकास के लिए वहां के नागरिकों के पास जमीन और घर के प्रॉपर्टी राइट का होना जरूरी है। दुनिया के बड़े बड़े देशों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनके पास जमीनों और घरों के प्रॉपर्टी राइट्स नहीं हैं। आज हम भारत के 6 लाख से अधिक गांवो्ं में ड्रोन से मैपिंग कराकर करोड़ों लोगों को उनके घर और जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड देने में जुटे हैं। ये डिजिटल रिकॉर्ड प्रॉपर्टी पर विवाद कम करने के साथ बैंक लोन तक लोगों की पहुंच बढ़ा रहा है। 

बदलते विश्व में टेक्नोलॉजी विद डेमोक्रेटिव वेल्यू को सुनिश्चित करना भी आवश्यक है– पीएम मोदी

पीएम मोदी ने आगे कहा कि- अध्यक्ष महोदय, आज हम सब जानते हैं कि मानव जीवन में टेक्नोलॉजी का कितना महत्व है, लेकिन बदलते विश्व में टेक्नोलॉजी विद डेमोक्रेटिव वेल्यू को सुनिश्चित करना भी आवश्यक है, भारतीय मूल के डॉक्टर इनोवेटर मैनेजर इंजीनियर किसी भी देश में रहें, हमारे लोकतांत्रिक मूल्य उन्हें मानवता की सेवा में जुटे रहने की प्रेरणा देते रहते हैं। और यह हमने इस कोरोना काल में भी देखा है। अध्यक्ष महोदय, कोरोना महामारी ने विश्व को यह भी सबक दिया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को अब और अधिक डायवर्सिफाय किया जाए। इसके लिए ग्लोबल वैल्यू चेन का विस्तार आवश्यक है, हमारा आत्मनिर्भर भारत अभियान इसी भावना से प्रेरित है। 

‘आज भारत बहुत तेजी के साथ 450 गीगावॉट रीन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा’

पीएम मोदी ने कहा कि बड़े और विकसित देशों की तुलना में क्लाइमेट एक्शन को लेकर भारत के प्रयासों को देखकर आप सभी को गर्व होगा। आज भारत बहुत तेजी के साथ 450 गीगावॉट रीन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है। हम भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने के अभियान में भी जुट गए हैं। अध्यक्ष महोदय हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को जवाब देना है कि जब फैसले लेने का समय था तब जिनपर विश्व को दिशा देने का दायित्व था वो क्या कर रहे थे। आज विश्व के सामने रिग्रेसिव थिंकिंग और एक्स्ट्रीमिज्म का खतरा बढ़ता जा रहा है। इन पसिस्थितियों में पूरे विश्व को साइंस आधारित तथा प्रोग्रेसिव थिंकिंग को विकास का आधार बनाना ही होगा। इसे मजबूत करने के लिए भारत एक्सपीरियंस आधारित लर्निक को बढ़ावा दे रहा है। हमारे स्कूलों में हजारों में अटल टिंकरिंग लैब खोली गई है और एक मजबूत स्टार्टअप माहौल विकसित हुआ है। 

‘भारत 75 ऐसे सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने वाला है’

पीएम मोदी ने कहा कि, भारत 75 ऐसे सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने वाला है जो भारतीय विद्यार्थी स्कूल कॉलेजों में बना रहे हैं। दूसरी ओर रिग्रेसिव थिंकिंग के साथ जो देश आतंकवाद का राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें यह समझना होगा कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। अध्यक्ष महोदय, हमारे समंदर भी हमारी साझी विरासत है, इसलिए हमें यह ध्यान रखना होगा कि समुद्री संपदा का हम इस्तेमाल करें उनका शोषण नहीं। समंदर अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लाइफलाइन भी है, इन्हें हमें एक्सपेंशन से बचाकर रखना होगा। 

सुरक्षा परिषद में भारत की प्रेसिडेंसी के दौरान बनी विस्तृत सहमति विश्व को समुद्री सुरक्षा के विषय में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है, भारत के महान कूट नीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले कहा था। जब सही समय पर सही कार्य नहीं किया जाता तो समय ही उस कार्य की सफलता को समाप्त कर देता है। संयुक्त राष्ट्र को खुद को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपनी इफेक्टिवनेस को सुधारना होगा। यूएन पर आज कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं, इन सवाल को हमने क्लाइमेट क्राइसिस में देखा है, कोविड क्राइसिस में देखा है, दुनिया के कई हिस्सों में चल रही प्रॉक्सी वॉर, आतंकवाद और अभी  अफगानिस्तान के संकट ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है। कोविड के ओरिजन के संदर्भ में और ईज और डूइंग बिजनेस रैंकिंग को लेकर वैश्विक गवर्नेंस से जुड़ी संस्थाओं ने दशकों के परिश्रम से बनी अपनी विश्वश्नीयता को नुकसान पहुंचाया है। यह जरूरी है कि हम यूएन को ग्लोबल ऑर्डर, ग्लोबल लॉ और ग्लोबल वेल्यूज के संरक्षण के लिए निरंतर सदृढ़ करें। मैं गुरुदेव रविंद्र नाथ टौगर के शब्दों के साथ अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। अपना शुभ कर्मपथ पर निर्भीक होकर आगे बढ़ो, सभी दुर्बलताएं और शंकाएं समाप्त हो, यह संदेश आज के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र के लिए जितना प्रासंगिक है उतना ही हर जिम्मेदार देश के लिए भी प्रासंगिक है। मुझे विश्वास है कि हम सबका प्रयास विश्व में शांति और सौहार्द बढ़ाएगा। विश्व को स्वस्थ सुरक्षित और समृद्ध बनाएगा। इन्हीं शुभकानाओं के साथ धन्यवाद





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